एससी/एसटी एक्ट और बीएनएस की गंभीर धाराओं में दर्ज है ताजा मामला

खैरागढ़। न्यायालय परिसर में 3 जुलाई को अनुसूचित जाति वर्ग से जुड़े एक पत्रकार एवं जिला पत्रकार संघ के सदस्य के साथ कथित जातिसूचक गाली-गलौज, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने के मामले में थाना खैरागढ़ में अपराध क्रमांक 0263/2026 दर्ज किया गया है। पुलिस ने धारा 3(2)(va) अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, तथा धारा 115(2), 296, 351(2) एवं 3(5) भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत प्रकरण कायम कर विवेचना शुरू की है। मामले में राज वर्मा उर्फ राज श्यामलाल आड़े और विनोद वर्मा को आरोपी बनाया गया है। पुलिस के अनुसार प्रकरण की जांच जारी है।
महाराष्ट्र में भी दर्ज हैं धोखाधड़ी के दो पुराने आपराधिक प्रकरण
उपलब्ध एफआईआर दस्तावेजों के अनुसार राज श्यामलाल आड़े का नाम महाराष्ट्र के नागपुर शहर में वर्ष 2017 में दर्ज दो अलग-अलग बैंक धोखाधड़ी के मामलों में भी आरोपी के रूप में दर्ज है। पहला मामला इमामवाड़ा थाना के अपराध क्रमांक 0027/2017 का है, जिसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 एवं 34 के तहत करीब 1.74 करोड़ रुपये की कथित बैंक धोखाधड़ी का आरोप दर्ज किया गया था। दूसरा मामला हिंगणा थाना के अपराध क्रमांक 0216/2017 का है, जिसमें धारा 120-बी, 403, 420, 465, 467, 468 एवं 471 आईपीसी के तहत लगभग 26.66 लाख रुपये के कथित कार लोन फर्जीवाड़े का मामला दर्ज हुआ था। इन मामलों में पुलिस रिकॉर्ड में उनका नाम आरोपी के रूप में दर्ज है।
डॉक्टर से मारपीट मामले में भी नाम आया था सामने
एफआईआर अभिलेखों के अनुसार वर्ष 2021 में नागपुर के लकड़गंज थाना में अपराध क्रमांक 0232/2021 दर्ज किया गया था। शिकायत के अनुसार अस्पताल में मरीज की मृत्यु के बाद डॉक्टर और अस्पताल स्टाफ के साथ कथित मारपीट एवं हंगामे की घटना हुई थी। इस मामले में धारा 143, 147, 149, 188, 323, 324, 452 और 504 आईपीसी सहित महाराष्ट्र मेडिकल सर्विसेज प्रोटेक्शन एक्ट, महामारी अधिनियम तथा आपदा प्रबंधन अधिनियम की धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया था। एफआईआर में राज वर्मा का नाम आरोपी के रूप में उल्लेखित है।
बाहरी व्यक्ति को लेकर शहर में बढ़ी नाराजगी
खैरागढ़ में दर्ज ताजा प्रकरण के बाद शहर में इस बात को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है कि महाराष्ट्र के नागपुर से आकर पिछले कुछ वर्षों से जिले में सक्रिय रहे व्यक्ति का नाम अब यहां दर्ज गंभीर आपराधिक प्रकरण में भी सामने आया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी बाहरी व्यक्ति के विरुद्ध पहले से अन्य राज्यों में भी आपराधिक प्रकरण दर्ज रहे हैं, तो ऐसे मामलों की गंभीरता से जांच होनी चाहिए। शहर में यह सवाल भी उठ रहा है कि शांतिप्रिय माहौल वाले खैरागढ़ में इस तरह की घटनाएं कानून-व्यवस्था के लिए चिंता का विषय हैं।
एफआईआर रिकॉर्ड ने बढ़ाए सवाल, जांच के बाद होगी सच्चाई स्पष्ट
उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार राज श्यामलाल आड़े उर्फ राज वर्मा का नाम महाराष्ट्र के विभिन्न थानों में दर्ज तीन अलग-अलग एफआईआर में भी आरोपी के रूप में दर्ज रहा है, जबकि खैरागढ़ में उनके विरुद्ध अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम तथा भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत नया प्रकरण दर्ज हुआ है। हालांकि इन सभी मामलों में न्यायिक प्रक्रिया जारी है और अंतिम निर्णय संबंधित न्यायालयों द्वारा किया जाना शेष है। ऐसे में इन प्रकरणों का अंतिम निष्कर्ष न्यायालय के निर्णय पर निर्भर करेगा।
पत्रकार संघ ने आधार कार्ड की जांच की उठाई मांग
जिला पत्रकार संघ ने संबंधित विभागों को पत्र भेजकर मांग की है कि आरोपी के आधार कार्ड में छत्तीसगढ़ का पता किस वैधानिक प्रक्रिया और किन दस्तावेजों के आधार पर दर्ज किया गया, इसकी निष्पक्ष जांच कराई जाए। संघ का कहना है कि यदि दस्तावेजों के सत्यापन में किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित प्रावधानों के तहत आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए। फिलहाल यह पत्रकार संघ की मांग है और इसकी जांच संबंधित सक्षम प्राधिकारी द्वारा की जानी शेष है।
ड्राइविंग लाइसेंस एवं दस्तावेजों की भी जांच की मांग
पत्रकार संघ ने यह भी मांग की है कि आरोपी के ड्राइविंग लाइसेंस एवं अन्य दस्तावेजों की वैधानिक जांच कराई जाए। संघ का कहना है कि उन्हें कुछ ऐसे इनपुट प्राप्त हुए हैं जिनके आधार पर दस्तावेजों की प्रामाणिकता की जांच आवश्यक प्रतीत होती है। हालांकि इन दावों की अभी किसी सरकारी एजेंसी द्वारा पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए संघ ने निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की है।
जनसंपर्क अधिकारी को भी भेजा गया पत्र
जिला पत्रकार संघ ने इस पूरे मामले की जानकारी जिला जनसंपर्क अधिकारी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई को भी लिखित रूप से दी है। पत्र में मांग की गई है कि स्वयं को पत्रकार बताने वाले संबंधित व्यक्तियों के पंजीयन, पहचान एवं अन्य अभिलेखों की सक्षम स्तर पर जांच कराई जाए। संघ का कहना है कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। वहीं सभी मामलों में अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच एजेंसियों और न्यायालय के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।





