खैरागढ़. मिडिल ईस्ट संकट और तकनीकी खामियों के चलते खैरागढ़ में गहराए रसोई गैस संकट को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। गुरुवार को राज्य शासन के निर्देशानुसार कलेक्ट्रेट सभागृह में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें जिले की सभी गैस एजेंसियों के डीलरों, कंपनियों के फील्ड अधिकारियों और पेट्रोल पंप मालिकों को तलब किया गया।
कलेक्टर के कड़े निर्देश: आपूर्ति में बाधा बर्दाश्त नहीं

बैठक की अध्यक्षता कर रहे कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल ने स्थिति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों और डीलरों को दो-टूक शब्दों में निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रसोई गैस जैसी अनिवार्य वस्तु की आपूर्ति में आम लोगों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए।सर्वर का समाधान कलेक्टर ने कंपनियों के फील्ड ऑफिसर्स को सख्त हिदायत दी कि पिछले तीन दिनों से जारी सर्वर की समस्या का निराकरण तत्काल प्रभाव से किया जाए।प्रशासनिक मौजूदगी बैठक में अपर कलेक्टर सुरेन्द्र ठाकुर और जिला खाद्य अधिकारी भुनेश्वर चेलक भी मौजूद रहे, जिन्होंने आपूर्ति व्यवस्था का फीडबैक लिया।
खाद्य अधिकारी का आश्वासन: 'पैनिक' न करें उपभोक्ता
बैठक के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए जिला खाद्य अधिकारी भुनेश्वर चेलक ने जिले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा:जिले में रसोई गैस और पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। लोगों को घबराने या पैनिक बुकिंग करने की कोई आवश्यकता नहीं है। पिछले तीन दिनों से सर्वर की जो तकनीकी समस्या आ रही थी, उसे आज शाम तक पूरी तरह ठीक कर लिया जाएगा।"
जमीनी हकीकत: चूल्हे पर लौटने को मजबूर थे ग्रामीण
बता दें कि पिछले कुछ दिनों से खैरागढ़ के ग्रामीण इलाकों जैसे टेकापार कला और पाण्डुका के लोग गैस सिलेंडरों के लिए दर-दर भटक रहे थे। राजेश मोहीले और नकुल राम वर्मा जैसे कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की थी कि सर्वर डाउन होने के कारण एजेंसियां उन्हें खाली हाथ लौटा रही थीं, जिससे लोग दोबारा पारंपरिक चूल्हों पर निर्भर हो गए थे।
कल से सुधरेंगे हालात?
प्रशासनिक सख्ती और तेल कंपनियों के आश्वासन के बाद अब सबकी नजरें कल यानी शुक्रवार की सुबह पर टिकी हैं। प्रशासन का दावा है कि आज शाम तक सर्वर ठीक होते ही पेंडिंग डिलीवरी तेजी से शुरू कर दी जाएगी।
बड़ा सवाल: अब देखना यह होगा कि इस उच्च-स्तरीय बैठक और कड़े निर्देशों के बाद क्या वाकई कल से खैरागढ़ के उपभोक्ताओं को समय पर गैस सिलेंडर मिल पाएगा या तकनीकी बाधाएं फिर से आड़े आएंगी।


