खैरागढ़। क्षेत्र में बेलगाम दौड़ते वाहन और सुरक्षा इंतजामों के प्रति प्रशासनिक उदासीनता अब आमजन के जीवन पर भारी पड़ने लगी है। मंगलवार शाम करीब 5 बजे कलेक्टर कार्यालय के सामने हुए एक भीषण सड़क हादसे ने एक बार फिर शहर की यातायात व्यवस्था और सुरक्षा दावों की पोल खोल दी है।

तेज रफ्तार अज्ञात कार की टक्कर से बाइक सवार दो युवक लहूलुहान हो गए, जिनमें से एक की नाजुक स्थिति को देखते हुए उसे मेडिकल कॉलेज रिफर किया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, नागपुर में मजदूरी करने वाले दो साथी देवराजू कुर्रे (19 वर्ष) और रवि महिलांगे (21 वर्ष) ग्राम दामरी स्थित अपने मामा के घर एक शादी समारोह में शामिल होने आए थे। मंगलवार को वे अपनी दुपहिया वाहन से एक अन्य रिश्तेदार के घर खम्हरिया जा रहे थे।प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जैसे ही वे कलेक्टर कार्यालय के समीप पहुंचे, एक महाराष्ट्र पासिंग अज्ञात कार को ओवरटेक करने के दौरान जबरदस्त भिड़ंत हो गई। हादसे में रवि के सिर और बाएं पैर में गंभीर चोटें आई हैं, वहीं देवराजू का चेहरा भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ है। स्थानीय लोगों ने तत्काल ई-रिक्शा के माध्यम से दोनों को जिला अस्पताल पहुँचाया, जहाँ रवि महिलांगे की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें तत्काल राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज रिफर कर दिया गया है।
12 सालों से अधूरा बाईपास: फाइलों में दबी जनता की सुरक्षा
जिला मुख्यालय खैरागढ़ में बढ़ते यातायात के दबाव को कम करने के लिए बाईपास का निर्माण पिछले 12 सालों से जारी है, लेकिन अफसोस कि 12 साल बीत जाने के बाद भी यह प्रोजेक्ट आज तक अधूरा है। खैरागढ़ के नागरिकों को एक दशक से भी अधिक समय से बाईपास का इंतजार है। यदि यह समय पर बन जाता, तो नगर के भीतर भारी वाहनों की आवाजाही कम होती और आए दिन होने वाले इन सड़क हादसों में निश्चित ही कमी आती। प्रशासन की यह सुस्ती अब लोगों की जान पर बन आई है।
अंधा मोड़ और गायब सुरक्षा मानक
हैरानी की बात यह है कि जिस स्थान पर यह हादसा हुआ, वह जिले का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र (कलेक्ट्रेट) है। यहाँ हजारों लोगों और अधिकारियों की आवाजाही रहती है, बावजूद इसके सड़क सुरक्षा के नाम पर शून्य इंतजाम हैं।
न ब्रेकर, न बैरिकेडिंग: कलेक्टर कार्यालय के सामने खतरनाक 'अंधा मोड़' होने के बाद भी यहाँ न तो स्पीड ब्रेकर हैं और न ही वाहनों की गति नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग।
विफल प्रबंधन: अभी एक सप्ताह पूर्व ही एम्बुलेंस की टक्कर से एक व्यक्ति की जान गई थी, जिसके बाद राजनीतिक प्रदर्शन भी हुए, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की नींद नहीं टूटी।
आवारा मवेशी और ठंडे बस्ते में निर्देश
गर्मी की दस्तक के साथ ही मुख्य मार्गों पर आवारा मवेशियों का जमावड़ा दुर्घटनाओं को न्योता दे रहा है। हालांकि, कलेक्टर हर साप्ताहिक समय-सीमा (TL) बैठक में मवेशी प्रबंधन के निर्देश देते हैं, लेकिन धरातल पर नगर पालिका और संबंधित विभाग की निष्क्रियता साफ झलक रही है।
जनता पूछ रही सवाल
लगातार हो रहे हादसों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। क्या जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि अपनी कुंभकर्णी नींद से जागकर जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे, या शहर ऐसे ही हादसों का गवाह बनता रहेगा?


