महंत बोले- लड़ाई खत्म कर सबको साथ लाने आया हूं, फिर भी सम्मेलन में नहीं दिखी कांग्रेस की पूरी ताकत
दो-दो नेता प्रतिपक्ष के विवाद के बीच महंत ने कराया शक्ति प्रदर्शन, लेकिन 150-200 कार्यकर्ताओं की मौजूदगी और कई बड़े नेताओं की गैरहाजिरी बनी चर्चा का विषय

खैरागढ़। नगर पालिका चुनाव से पहले खैरागढ़ कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आ गई। छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत सोमवार को संगठन में एकता का संदेश देने खैरागढ़ पहुंचे, लेकिन उनके दौरे के दौरान कार्यकर्ता सम्मेलन में अपेक्षित भीड़ नहीं जुट सकी। जिलेभर से कार्यकर्ताओं को बुलाया गया था, फिर भी कार्यक्रम में करीब 150 से 200 कार्यकर्ता ही नजर आए। इससे संगठन की जमीनी स्थिति और गुटबाजी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। डॉ.महंत का कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों, आतिशबाजी और नारों के साथ भव्य स्वागत किया। उन्होंने दंतेश्वरी मंदिर और रुक्खड़ स्वामी मंदिर में दर्शन-पूजन किया तथा विधायक यशोदा नीलांबर वर्मा के निवास पहुंचकर सौजन्य भेंट की। इसके बाद सांस्कृतिक भवन में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने संगठन में एकजुटता पर जोर दिया। खैरागढ़ नगर पालिका में कांग्रेस के छह पार्षद होने के बावजूद नेता प्रतिपक्ष को लेकर लंबे समय से विवाद बना हुआ है। वर्तमान में दो-दो नेता प्रतिपक्ष होने की स्थिति प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बनी हुई है। इस मुद्दे पर पूछे गए सवाल के जवाब में डॉ. महंत ने साफ कहा मैं यहां लड़ाई-झगड़ा खत्म करने और सबको एकजुट करने आया हूं। कांग्रेस कार्यकर्ता जब एकजुट रहते हैं तो बड़ी से बड़ी लड़ाई जीत सकते हैं। अपने संबोधन में उन्होंने आगामी नगर पालिका चुनाव को कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सभी मतभेद भुलाकर एकजुट होकर चुनाव लड़ना होगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं को याद दिलाया कि उपचुनाव और विधानसभा चुनाव में मिली सफलता संगठन की एकजुटता का परिणाम थी। हालांकि सम्मेलन में कांग्रेस की पूरी ताकत नजर नहीं आई। जिलेभर से कार्यकर्ताओं को आमंत्रित किए जाने के बावजूद उपस्थिति सीमित रही। वहीं कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और जनप्रतिनिधि भी कार्यक्रम से दूर दिखाई दिए। पूर्व विधायक गिरवर जंघेल, नगर पंचायत अध्यक्ष नम्रता वैष्णव, नगर पालिका उपाध्यक्ष रज्जाक खान, नेता प्रतिपक्ष दिलीप लहरे सहित कई प्रमुख चेहरे कार्यक्रम में मौजूद नहीं थे। उनकी गैरमौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में नए सवाल खड़े कर दिए हैं।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नेता प्रतिपक्ष के दौरे के बावजूद यदि संगठन के सभी गुट और नेता एक मंच पर नजर नहीं आए, तो यह कांग्रेस के लिए चिंतन का विषय है। वहीं कार्यकर्ताओं के बीच भी यह चर्चा रही कि विधायक यशोदा वर्मा जिलेभर के कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं को एकजुट करने में पूरी तरह सफल नहीं दिखीं। अपने भाषण में डॉ. महंत ने प्रदेश सरकार पर भी हमला बोला। उन्होंने कानून-व्यवस्था, किसानों को खाद-बीज की उपलब्धता, बढ़ती महंगाई और पेट्रोल-डीजल की समस्या को लेकर राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। नगर पालिका चुनाव से पहले आयोजित यह सम्मेलन कांग्रेस के लिए शक्ति प्रदर्शन के साथ-साथ संगठनात्मक एकता की परीक्षा भी माना जा रहा है। डॉ. महंत का दौरा भले ही एकता का संदेश देने के लिए था, लेकिन सम्मेलन में कम भीड़, कई बड़े नेताओं की गैरमौजूदगी और संगठन के भीतर जारी खींचतान ने यह संकेत जरूर दे दिया कि चुनावी रण में उतरने से पहले कांग्रेस को अपने घर की दूरी मिटानी होगी।

