जालाबांधा के ग्रामीणों का प्रदर्शन; चारागाह, निस्तार भूमि और खेतों के रास्ते प्रभावित होने का दावा, मामले की निष्पक्ष जांच की उठाई मांग
खैरागढ़। ग्राम जालाबांधा के ग्रामीणों ने ग्राम कोटवार ईश्वर बंजारे के खिलाफ कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कोटवार ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए गांव की शासकीय निस्तार एवं चारागाह भूमि को नियमों के विपरीत अपने नाम कोटवारी सेवा भूमि के रूप में दर्ज करा लिया है। ग्रामीणों ने कोटवार को पद से बर्खास्त करने, कथित अतिक्रमण हटाने तथा विवादित भूमि को पुनः शासकीय मद में दर्ज करने की मांग की है। ग्रामीणों की ओर से विनोद चोपड़ा सहित ग्रामवासियों द्वारा सौंपे गए आवेदन में कहा गया है कि ईश्वर बंजारे पिछले लगभग पांच वर्षों से ग्राम जालाबांधा में अस्थायी कोटवार के रूप में कार्यरत हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ग्राम पंचायत के प्रस्ताव और ग्रामसभा की स्वीकृति के बिना गांव की सार्वजनिक उपयोग की भूमि को कोटवारी सेवा भूमि के रूप में दर्ज करा लिया गया। आवेदन के अनुसार खसरा नंबर 141, 276, 441, 582, 598 और 624/2 सहित कुल लगभग 10 एकड़ भूमि को सेवा भूमि के रूप में दर्ज किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि उक्त भूमि गांव की निस्तार और चारागाह भूमि रही है, जिसका उपयोग वर्षों से आम ग्रामीणों द्वारा किया जाता रहा है। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया में न तो ग्राम पंचायत से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लिया गया और न ही ग्रामीणों को इसकी जानकारी दी गई। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि शासकीय भूमि को फर्जी तरीके से अपने नाम दर्ज कराने का प्रयास किया गया है, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
खेतों तक पहुंचने में हो रही परेशानी
ग्रामीणों ने बताया कि विवादित भूमि किसानों के खेतों और खेतों तक पहुंचने वाले मार्गों के बीच स्थित है। भूमि पर कथित कब्जे और घेराबंदी के कारण किसानों को खेतों तक आने-जाने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से उपयोग में रहे रास्ते प्रभावित हो गए हैं, जिससे कृषि कार्यों पर भी असर पड़ रहा है।
पहले भी कोटवार को मिल चुकी है सेवा भूमि
ज्ञापन में ग्रामीणों ने यह भी उल्लेख किया है कि ग्राम जालाबांधा में पूर्व में पदस्थ एक कोटवार को ग्राम पंचायत द्वारा लगभग 10 एकड़ भूमि सेवा भूमि के रूप में प्रदान की जा चुकी थी। ऐसे में वर्तमान कोटवार को पुनः सेवा भूमि के नाम पर अतिरिक्त शासकीय भूमि दिए जाने का कोई औचित्य नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में शासकीय भूमि सीमित है और उसका उपयोग भविष्य में शासकीय कार्यालयों, सार्वजनिक सुविधाओं तथा सामुदायिक जरूरतों के लिए किया जाना चाहिए।
उप तहसील मुख्यालय होने से भूमि की जरूरत
ग्रामीणों के अनुसार जालाबांधा उप तहसील मुख्यालय है, जहां भविष्य में विभिन्न शासकीय कार्यालयों और जनसुविधाओं के लिए भूमि की आवश्यकता पड़ सकती है। गांव में उपलब्ध शासकीय भूमि पहले से ही सीमित है। ऐसे में सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर निजी दावा गांव के विकास और प्रशासनिक जरूरतों के लिए बाधक साबित हो सकता है।
चारागाह भूमि के उपयोग पर भी सवाल
शिकायतकर्ताओं ने आवेदन में कहा है कि कोटवार शासन से नियमित मानदेय प्राप्त कर रहे हैं, इसलिए सार्वजनिक चारागाह भूमि को सेवा भूमि के रूप में उपयोग करने का कोई औचित्य नहीं है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सार्वजनिक हित की भूमि को व्यक्तिगत उपयोग के लिए सुरक्षित करने का प्रयास किया गया है, जिससे ग्रामीणों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
भूमि विक्रय का भी लगाया आरोप
आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि खसरा नंबर 615 की लगभग 1 हेक्टेयर (2.47 एकड़) भूमि, जो शासकीय चारागाह भूमि बताई गई है, को कोटवार के पिता स्वर्गीय बिशेलाल बंजारे के नाम पर पट्टा बनाकर बिना सक्षम अनुमति के विक्रय किया गया। ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार व्यक्तियों पर कार्रवाई की मांग की है।
शासकीय कार्यों में सहयोग नहीं करने का आरोप
ग्रामीणों ने कोटवार पर यह आरोप भी लगाया कि वे शासन की योजनाओं और प्रशासनिक सूचनाओं से संबंधित मुनादी नियमित रूप से नहीं करते हैं। इसके कारण ग्रामीणों तक कई महत्वपूर्ण जानकारियां समय पर नहीं पहुंच पातीं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कोटवार अपने दायित्वों के निर्वहन में भी लापरवाही बरत रहे हैं।
बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे कलेक्टर कार्यालय
मामले को लेकर संकेत कोठारी, दीनदयाल सिन्हा, नन्दूराम, प्यारेलाल, तुषार वर्मा, महेश गुप्ता, बृजलाल, रोहित वर्मा, रामदास, दीनदयाल वर्मा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने मांग की कि कथित रूप से अतिक्रमित शासकीय भूमि को तत्काल मुक्त कराया जाए, भूमि के नामांतरण और दर्ज प्रक्रिया की जांच कराई जाए तथा दोषी पाए जाने पर संबंधित कोटवार के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि शासकीय भूमि गांव की सामूहिक संपत्ति है और उसका संरक्षण प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने जिला प्रशासन से मामले में शीघ्र हस्तक्षेप कर न्यायोचित कार्रवाई करने की मांग की है। अब इस पूरे प्रकरण में जिला प्रशासन की जांच और कार्रवाई पर ग्रामीणों की निगाहें टिकी हुई हैं।


