खैरागढ़। नवीन जिला खैरागढ़-छुईखदान-गंडई के मुख्यालय से लगभग 12 किमी दूर ग्राम देवरी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। कथा के दौरान आचार्य नरेन्द्र नयन शास्त्री चाय वाले बाबा ने भक्ति का गूढ़ संदेश देते हुए कहा कि भगवान राग से नहीं, बल्कि अनुराग से मिलते हैं। उन्होंने मीराबाई की एक प्रसंग कथा सुनाते हुए बताया कि भजन में केवल सुर-ताल या वाद्ययंत्र का महत्व नहीं है बल्कि हृदय में प्रभु के प्रति सच्चा प्रेम और अनुराग होना जरूरी है। यदि भक्ति में अनुराग नहीं है, तो साधना अधूरी रह जाती है। आचार्य ने कहा कि मीराबाई, कबीर, सूरदास, तुलसीदास, रैदास और रसखान जैसे संतों ने अपनी भक्ति से यही सिद्ध किया है कि सच्चा प्रेम ही ईश्वर प्राप्ति का मार्ग है। उन्होंने वर्तमान समय पर चिंता जताते हुए कहा कि आज भक्ति में दिखावा बढ़ गया है—भव्य पंडाल, माइक, सोशल मीडिया का आकर्षण लेकिन हृदय में अनुराग की कमी है। उन्होंने कहा कि हमें हर कार्य को प्रभु का कार्य मानकर करना चाहिए, तभी त्याग और प्रेम का भाव जागृत होगा और वही अनुराग का रूप लेगा। आचार्य नरेन्द्र नयन शास्त्री, जिन्हें चाय वाले बाबा के नाम से भी जाना जाता है, प्रतिदिन सुबह 9 से 12 बजे तक अपना दिव्य दरबार लगाते हैं जहां बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याओं के समाधान की आशा लेकर पहुंचते हैं। विशेष बात यह है कि वे भागवत कथा से प्राप्त समस्त चढ़ावे को गरीब बेटियों के हित में दान कर देते हैं। ग्राम देवरी में चल रही इस कथा में न केवल ग्रामीण बल्कि दूर-दूर से आए श्रद्धालु और शिष्य बड़ी संख्या में शामिल होकर धर्म लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
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