खैरागढ़। खैरागढ़ से कवर्धा मार्ग (स्टेट हाईवे-05) की जर्जर हालत को लेकर लोक निर्माण विभाग (PWD) एक बार फिर सवालों के घेरे में है। दुर्ग संभाग के मुख्य अभियंता की कड़ी फटकार के बाद भी जमीनी स्थिति में कोई सुधार नहीं दिख रहा, जिससे विभाग और ठेकेदार की कार्यशैली पर गंभीर संदेह खड़ा हो गया है।
2 दिन में जवाब तलब, फिर भी हाल जस के तस

18 मार्च 2026 को जारी पत्र में दुर्ग संभाग के मुख्य अभियंता ने कार्यपालन अभियंता खैरागढ़ को स्पष्ट चेतावनी दी थी कि कई बार निर्देश देने के बावजूद सड़क का संधारण नहीं हुआ। इसे घोर लापरवाही मानते हुए 2 दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस सुधार नजर नहीं आया।
दो साल में ही बदहाल हुई 6.39 करोड़ की सड़क
करीब 639.10 लाख रुपए की लागत से बनी इस सड़क में 439.75 लाख का भुगतान भी हो चुका है। 2021 में शुरू होकर 2024 में पूर्ण बताई गई 16 किमी लंबी सड़क आज जगह-जगह गड्ढों में तब्दील है जो निर्माण गुणवत्ता पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
आदेश के बाद ‘लिपापोती’ मरम्मत
स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभागीय दबाव के बाद महज 20-30 मीटर हिस्से में ही घटिया डामर डालकर औपचारिक मरम्मत की गई। यह तथाकथित “थूक-पॉलिश” कुछ ही दिनों में उखड़ जाती है, जिससे साफ है कि काम सिर्फ दिखावे के लिए किया जा रहा है।
PG अवधि में भी ठेकेदार की लापरवाही
सड़क की परफॉर्मेंस गारंटी (PG) 2029 तक है, इसके बावजूद नियमित संधारण नहीं किया जा रहा। यह अनुबंध की शर्तों का सीधा उल्लंघन है, लेकिन विभाग अब तक कोई सख्त कदम उठाने से बचता नजर आ रहा है।
भुगतान पर भी उठे सवाल
इतनी खराब गुणवत्ता के बावजूद 439.75 लाख रुपए का भुगतान होना अपने आप में बड़ा सवाल है। बिना गुणवत्ता जांच के भुगतान कैसे हुआ, इसकी उच्चस्तरीय जांच की मांग उठ रही है।
अधिकारियों की चुप्पी, संदेह गहरा
मामले में जब जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगा गया, तो वे लंच के बाद मिलेंगे कहकर टालते रहे। पिछले दो दिनों से उनकी अनुपस्थिति ने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया है।
ठेकेदार भी सवालों से बचते नजर आए
इस मामले में ठेकेदार संजय सिंगी से संपर्क किया गया तो उन्होंने अभी बाहर हूं कहकर जवाब देने से बचने की कोशिश की। इससे संदेह और गहरा गया है।
कांग्रेस की चेतावनी — होगा उग्र आंदोलन
शहर कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. अरुण भारद्वाज ने इसे सीधा भ्रष्टाचार करार देते हुए चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन और चक्का जाम किया जाएगा।
अब बड़ा सवाल…
दुर्ग संभाग से फटकार लगने के बावजूद जब जमीनी हकीकत नहीं बदल रही, तो क्या वास्तव में जिम्मेदार इंजीनियर और ठेकेदार के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई होगी?
या फिर यह मामला भी कागजों में ही दबकर रह जाएगा?
जनता में आक्रोश, आंदोलन के आसार
करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद सड़क की दुर्दशा अब जनता के गुस्से का कारण बन चुकी है। अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो खैरागढ़ में यह मुद्दा बड़ा जनआंदोलन बन सकता है।


