खैरागढ़। खैरागढ़ से कवर्धा मार्ग (स्टेट हाईवे क्रमांक-05) को लेकर लोक निर्माण विभाग (PWD) पर गंभीर लापरवाही, घटिया निर्माण और ठेकेदार से सांठगांठ के आरोप तेज हो गए हैं। करोड़ों की लागत से बनी सड़क महज दो साल में जर्जर हो गई है, जबकि विभाग अब तक ठोस कार्रवाई करने में नाकाम नजर आ रहा है।

शहर कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष डॉ. अरुण भारद्वाज ने विभाग पर ठेकेदार को पक्षपातपूर्ण लाभ पहुंचाने का आरोप लगाते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने साफ कहा कि थूक-पॉलिश से काम नहीं चलेगा दोषी इंजीनियर और ठेकेदार पर कार्रवाई नहीं हुई तो कांग्रेस उग्र आंदोलन और चक्का जाम करेगी।
दो साल में उखड़ी 6.39 करोड़ की सड़क

जिला मुख्यालय को साल्हेवारा वनांचल, गंडई और छुईखदान से जोड़ने वाली इस सड़क के लिए 22 दिसंबर 2020 को 639.10 लाख रुपए स्वीकृत हुए थे। अब तक 439.75 लाख रुपए का भुगतान भी किया जा चुका है। 7 अगस्त 2021 को ठेकेदार संजय सिंधी को कार्यादेश जारी हुआ और 15 अक्टूबर 2021 से काम शुरू हुआ। विभागीय रिकॉर्ड में 3 फरवरी 2024 को कार्य पूर्ण बताया गया, लेकिन हकीकत में करीब 16 किमी लंबी सड़क जगह-जगह गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। घटिया निर्माण और मिलीभगत के आरोप भारद्वाज ने आरोप लगाया कि निर्माण के दौरान गुणवत्ता से समझौता किया गया और बाद में संधारण कार्य भी नहीं कराया गया। ठेकेदार से ली गई परफॉर्मेंस गारंटी (PG) राशि के बावजूद चार साल में सड़क की हालत नहीं सुधरी। उन्होंने इसे अधिकारियों और ठेकेदार के बीच आर्थिक सांठगांठ का संकेत बताया।
पीजी अवधि के बावजूद मरम्मत नहीं

सड़क की पीजी अवधि 2 फरवरी 2029 तक है, इसके बावजूद नियमित मरम्मत नहीं हो रही। स्थानीय लोगों का कहना है कि शिकायत के बाद केवल दिखावे के लिए मरम्मत की जाती है, जो कुछ ही दिनों में उखड़ जाती है।
फटकार के बाद भी नहीं सुधरे हालात
मुख्य अभियंता, लोक निर्माण विभाग, दुर्ग परिक्षेत्र ने 18 मार्च 2026 को जारी ज्ञापन में कार्यपालन अभियंता को फटकार लगाते हुए स्पष्ट किया कि कई बार निर्देश देने के बावजूद संधारण कार्य नहीं कराया गया। इसे कर्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही बताते हुए अधिकारियों से 2 दिन में स्पष्टीकरण मांगा गया है और अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
थूक-पॉलिश’ मरम्मत से बढ़ा आक्रोश
फटकार के बाद विभाग और ठेकेदार द्वारा केवल औपचारिकता निभाने के लिए सतही मरम्मत किए जाने के आरोप सामने आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मरम्मत कुछ ही दिनों में उखड़ जाती है, जिससे समस्या जस की तस बनी हुई है। 4.39 करोड़ भुगतान पर सवाल जागरूक नागरिकों ने 439.75 लाख रुपए के भुगतान पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इतने खराब काम के बावजूद भुगतान कैसे हुआ, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। कार्रवाई सिर्फ कागजों में? विभाग की ओर से ठेकेदार की श्रेणी पदावनत करने जैसी बातें कही जा रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस सुधार नजर नहीं आ रहा। इस ठेकेदार पर पहले भी निर्माण कार्यों में लापरवाही के आरोप लग चुके हैं। ईई का दावा- दिए गए निर्देश ईई पी. सिंह दीवान ने कहा कि ठेकेदार को जल्द मरम्मत कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। कांग्रेस की चेतावनी के बाद यदि जल्द सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो खैरागढ़ में सड़क मुद्दे पर बड़ा जन आंदोलन खड़ा हो सकता है।


